WHO की चेतावनी: भारत में 3 कफ सिरप से जान का खतरा, MP में 25 बच्चों की मौत; कोल्ड्रिफ प्रमुख दोषी
कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश TR और रीलाइफ सिरप में जहरीले तत्व पाए गए, WHO ने वैश्विक अलर्ट जारी किया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में निर्मित तीन कफ सिरप को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। इन दवाओं को बच्चों के लिए जानलेवा बताते हुए WHO ने इन्हें वैश्विक स्तर पर पहचानने और रोकने की अपील की है। चेतावनी में जिन दवाओं का ज़िक्र है, उनमें कोल्ड्रिफ (Shriisan Pharma), रेस्पिफ्रेश TR (Rudnex Pharma) और रीलाइफ (Shaphar Pharma) शामिल हैं।
इनमें सबसे खतरनाक मामला कोल्ड्रिफ कफ सिरप का सामने आया है, जिससे मध्य प्रदेश में अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है।
🧪 कफ सिरप में 500 गुना अधिक जहरीला रसायन
सरकारी जांच में पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा मानक से करीब 500 गुना अधिक थी। DEG और एथिलीन ग्लाइकॉल दोनों ही किडनी को स्थायी नुकसान पहुंचाने वाले जहरीले तत्व हैं। बच्चों की मौत का मुख्य कारण भी यही बताया गया।
मध्य प्रदेश पुलिस की जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि बच्चों को यह कफ सिरप दिया गया था, जिसके तुरंत बाद उनमें गंभीर किडनी फेलियर के लक्षण दिखे और इलाज के बावजूद उनकी मौत हो गई।
👶 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर सबसे बड़ा असर
सभी 25 मौतें 5 साल से कम उम्र के बच्चों की हुई हैं। WHO की रिपोर्ट में इन मौतों को “औद्योगिक लापरवाही” से जोड़ते हुए भारत सरकार से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
🏭 छोटी फैक्ट्री, बड़ी लापरवाही: श्रीसन फार्मा का लाइसेंस रद्द
कोल्ड्रिफ सिरप बनाने वाली श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (Shriisan Pharmaceuticals) को अब तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग ने पूरी तरह बंद कर दिया है। कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।
यह फैक्ट्री कांचीपुरम में मात्र 2000 वर्ग फीट के लोहे के शेड में काम कर रही थी, जहां न तो गुणवत्ता मानक पूरे किए जा रहे थे, न ही कोई आधुनिक तकनीक थी। इसके बावजूद यह कंपनी 2011 से लगातार कफ सिरप बना रही थी।
👮 मालिक गिरफ्तार, 10 दिन की पुलिस रिमांड
श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन गोविंदन (75) को 9 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया। उन्हें मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पकड़ा और 20 अक्टूबर तक की रिमांड पर भेजा गया है।
🛡️ WHO का अलर्ट: विदेशों में भी फैला हो सकता है ज़हर
WHO ने 9 अक्टूबर को भारत से पूछा था कि क्या यह दूषित कफ सिरप विदेशों में निर्यात किया गया है। भारत की केंद्रीय दवा निगरानी एजेंसी CDSCO ने जवाब दिया कि कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह सिरप निर्यात हुआ हो। हालांकि WHO ने देशों से सतर्क रहने को कहा है।
⚕️ केंद्र सरकार की एडवाइजरी: 2 साल से छोटे बच्चों को न दें कफ सिरप
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूरे देश में हेल्थ एडवाइजरी जारी कर दी है। सलाह में कहा गया है:
“2 साल से छोटे बच्चों को किसी भी प्रकार का कफ सिरप न दिया जाए। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स घातक हो सकते हैं।”
📉 सिस्टम फेल? 10 साल से नियमों की अनदेखी
श्रीसन फार्मा की फैक्ट्री पर कार्रवाई से यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर कैसे एक घटिया क्वालिटी वाली फैक्ट्री 10 साल तक बिना रोकटोक दवाएं बनाती रही?
CDSCO और TNFDA की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या नियमित निरीक्षणों में लापरवाही हुई? और अगर हुई, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
📌 निष्कर्ष: एक चेतावनी नहीं, बड़ा सबक
WHO की चेतावनी भारत के लिए सिर्फ दवा की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं है, यह एक सिस्टमेटिक फेल्योर का प्रतीक है। अब वक्त आ गया है कि फार्मा इंडस्ट्री के नियमों की न केवल समीक्षा की जाए, बल्कि ज़िम्मेदारियों को तय किया जाए — ताकि फिर कोई बच्चा सिर्फ खांसी की दवा से अपनी जान न गंवाए।
