Apr 18 2026 / 12:12 AM

एमपी के 9 जिलों में बारिश का दौर: लो प्रेशर एरिया से बदला मौसम, 25 से 27 अक्टूबर तक असर रहेगा तेज

देश के दक्षिणी हिस्से में सक्रिय लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव क्षेत्र) ने मध्यप्रदेश के मौसम का मिज़ाज बदल दिया है। पिछले 24 घंटों में धार, सतना सहित 9 जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि भोपाल और आसपास के इलाकों में बादल छाए रहे।

मौसम विभाग के मुताबिक, यह सिस्टम दक्षिण-पूर्व अरब सागर से होकर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है। अगले 24 घंटे में इसका असर और बढ़ेगा। 25 से 27 अक्टूबर के बीच प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज़ हवा की स्थिति बनने की संभावना है।

शुक्रवार को इन जिलों में हो सकती है बारिश

बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में शुक्रवार को हल्की वर्षा के आसार हैं। बीते 24 घंटे में भी अशोकनगर, छतरपुर, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सतना, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी और धार में बूंदाबांदी हुई है।

भोपाल में बादल, तापमान में गिरावट

गुरुवार को भोपाल में पूरे दिन बादल छाए रहे, जिससे अधिकतम तापमान घटकर 31.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इंदौर में 32, उज्जैन में 34, ग्वालियर में 33.8 और जबलपुर में 31.9 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। बैतूल, दमोह, रीवा, सीधी और उमरिया समेत कई जिलों में भी दिन का पारा नीचे गया है। हालांकि, रात में तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है, इसलिए अभी तेज़ ठंड का अहसास नहीं है।

नवंबर से कड़ाके की सर्दी की शुरुआत

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, नवंबर से ठंड का दौर शुरू होगा जो जनवरी तक चरम पर रहेगा। इस साल ठंड का असर फरवरी तक बने रहने के संकेत हैं। अनुमान है कि 2010 के बाद यह सबसे ठंडी सर्दी हो सकती है। साथ ही, पश्चिमी विक्षोभ के कारण सर्दियों में सामान्य से ज्यादा बारिश भी देखने को मिल सकती है। आईएमडी के अनुसार, जल्द ही ला-नीना परिस्थितियां विकसित होंगी, जिससे ठंड और बढ़ सकती है।

प्रदेश से विदा हुआ मानसून

13 अक्टूबर को पूरे मध्यप्रदेश से मानसून की औपचारिक विदाई हो चुकी है। इस बार मानसून 16 जून से 13 अक्टूबर तक यानी 3 महीने 28 दिन सक्रिय रहा। इसके बावजूद, बारिश के छोटे दौर अब भी जारी रहेंगे।

इस बार मानसून की रही “हैप्पी एंडिंग”

इस सीजन में प्रदेश के 30 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। गुना जिला सबसे आगे रहा, जहां 65.7 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि श्योपुर में औसत से 216% ज्यादा पानी गिरा।
इसके विपरीत शाजापुर में सबसे कम बारिश (28.9 इंच, यानी 81%) हुई।

प्रदेश में कुल मिलाकर अनुमान से 15% अधिक वर्षा दर्ज की गई। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में तो दोगुनी बारिश हुई, जबकि भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों — उज्जैन, सीहोर, बैतूल और शाजापुर — में औसत से थोड़ी कम बारिश हुई।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष की अच्छी बारिश से पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा और भूजल स्तर भी ऊंचा बना रहेगा।

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