15 साल बाद चंबल में फिर डकैतों की दहशत
25 हजार का इनामी योगी गुर्जर बना आतंक, गर्भवती महिला के अपहरण के बाद जंगलों में चला सर्च ऑपरेशन
ग्वालियर।
कभी डकैतों के लिए कुख्यात रहा चंबल का इलाका एक बार फिर दहशत के साए में है। करीब 15 साल की शांति के बाद अब 25 हजार रुपये के इनामी डकैत योगेंद्र उर्फ योगी गुर्जर ने ग्वालियर–मुरैना के जंगलों में आतंक फैलाना शुरू कर दिया है। बीते दिनों उसने अपनी गैंग के साथ ग्वालियर के तिघरा क्षेत्र के गुर्जा गांव में अंधाधुंध फायरिंग कर नौ माह की गर्भवती महिला अंजू गुर्जर का अपहरण कर लिया था।
हालांकि पुलिस की घेराबंदी के बाद 24 घंटे में अंजू को छुड़ा लिया गया, लेकिन अब योगी गुर्जर ने गांव को “भंवरपुरा” बना देने की धमकी देकर फिर से पूरे इलाके में डर फैला दिया है।
🔥 200 जवानों का एंटी-डकैत अभियान
शनिवार को ग्वालियर और मुरैना पुलिस ने छह थानों से 200 जवानों की संयुक्त टीम बनाकर जंगलों में एंटी-डकैत सर्च ऑपरेशन चलाया। यह अभियान सुबह 6 बजे से शुरू हुआ और करीब 7 घंटे तक चला, जिसमें पुलिस ने 20 किलोमीटर तक का इलाका खंगाला।
डकैतों की सक्रियता और पुलिस की हलचल से जंगल से लगे गांवों में तनाव का माहौल है।
🩸 15 साल बाद टूटी चुप्पी, याद आया “भंवरपुरा नरसंहार”
ग्वालियर जिले के भंवरपुरा गांव में 2007 में डकैतों की गड़रिया गैंग ने 12 ग्रामीणों को बांधकर गोलियों से भून दिया था। उस घटना के बाद चंबल क्षेत्र में पुलिस के लगातार दबाव से डकैतों का नाम तक मिट गया था। अब 15 साल बाद योगी गुर्जर की गैंग ने फिर वही दहशत वापस ला दी है।
🚨 कार्रवाई में लापरवाही पर टीआई लाइन हाजिर
डकैत की तलाश के दौरान तिघरा थाना प्रभारी शिवकुमार शर्मा पर गंभीर लापरवाही सामने आई। उन्होंने सर्च टीम भेजने के बजाय थाने के स्टाफ के साथ दीपावली की खरीदारी करने बाजार पहुंच गए।
इस पर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने उन्हें लाइन हाजिर कर दिया है।
😨 परिवार पर मंडरा रहा डर
डकैत के चंगुल से छूटने के बाद अंजू गुर्जर ने ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में बेटे को जन्म दिया है। लेकिन अब उसका परिवार गांव लौटने से डर रहा है। अंजू के ससुर ब्रजलाल ने बताया कि डकैत ने चरवाहों के ज़रिए धमकी भिजवाई है कि
“दीपावली तक गुर्जा गांव को भंवरपुरा बना देंगे।”
परिवार फिलहाल पुलिस सुरक्षा की मांग कर रहा है।
🏞️ जंगल में मिले ठिकाने, पुलिस पहुंची झोंपड़ियों तक
सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने लंका पहाड़ के पीछे झोंपड़ों में डकैतों के ठहरने के ठिकाने खोज निकाले। ग्रामीणों से बातचीत में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस को संदेह है कि डकैत के कई मददगार आसपास के गांवों में हैं, जो उसी जातीय समूह से जुड़े हैं।
एसएसपी धर्मवीर सिंह ने ग्रामीणों से अपील की है—
“डकैतों की कोई भी जानकारी पुलिस को दें, नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।”
