“पेट आर-पार कर गए तीन लोहे के सरिए, इंदौर में डॉक्टरों की टीम ने चमत्कारिक ऑपरेशन कर बचाई मजदूर की जान”
इंदौर: जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे एक मजदूर की जान इंदौर के डॉक्टरों ने बचाई है। फिनिक्स मॉल के सामने सेटरिंग का काम करते समय दूसरी मंजिल से गिरे 25 वर्षीय नितेश जायसवाल के पेट में तीन लोहे के सरिये आर-पार हो गए थे। एमवाय अस्पताल की विशेष चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए जटिल ऑपरेशन कर नितेश की जान बचाई।
घटना का विवरण:
20 सितंबर को दोपहर करीब चार बजे, उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी नितेश जायसवाल, जो पिछले चार साल से इंदौर में सेटरिंग का काम कर रहे थे, फिनिक्स मॉल के सामने एक इमारत की दूसरी मंजिल पर काम कर रहे थे। अचानक उनका पैर फिसल गया और वे नीचे गिर गए। दुर्भाग्यवश, वे उस जगह गिरे जहाँ सेप्टिक टैंक का काम चल रहा था और कॉलम के सरिये बाहर निकले हुए थे।
गिरते ही, तीन लोहे के सरिये नितेश के पेट में घुस गए। दो सरिये पेट के आर-पार हो गए, जबकि एक सरिया शरीर के दूसरी तरफ जांघ तक पहुँच गया।
त्वरित बचाव और अस्पताल का सफर:
नितेश की गंभीर हालत देखकर उनके जीजा ने सूझबूझ दिखाते हुए सरियों को रस्सी से बांधा और सरियों को काटकर तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से एमवाय अस्पताल पहुँचाया।
जटिल ऑपरेशन और डॉक्टरों की सूझबूझ:
एमवाय अस्पताल में पहुंचते ही, डॉक्टरों की विशेष टीम ने नितेश की जांच की। सरियों के पेट से आर-पार होने और एक के जांघ तक पहुँचने की स्थिति को देखते हुए, डॉ. सुदर्शन ओडिया के नेतृत्व वाली टीम ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला किया। डॉक्टरों का मानना था कि अगर सरियों को समय पर नहीं निकाला जाता तो नितेश की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
मरीज को तुरंत भर्ती कर फ्लूड्स और खून चढ़ाया गया और उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
ऑपरेशन के दौरान:
ऑपरेशन के दौरान, डॉक्टरों ने पाया कि सरियों के कारण नितेश के पेट में करीब एक लीटर खून जमा हो गया था, जिसे निकाला गया। तीनों सरियों को सावधानी से बाहर निकाला गया। सरियों के कारण बड़ी आंत, छोटी आंत और अंत्रपेशी (mesentery) में तीन जगह छेद हो गए थे, जिन्हें ऑपरेशन के दौरान सील कर ठीक किया गया।
ऑपरेशन में यह भी पता चला कि सरियों के कारण रीढ़ और कूल्हे की हड्डी में भी फ्रैक्चर हो गया था, जिसका तुरंत इलाज किया गया।
रिकवरी और भविष्य:
नितेश को पांच दिन तक एमवाय अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया। शुक्रवार को, पांच दिन बाद, जब उनकी हालत स्थिर हुई और वे ठीक से खाना-पीना शुरू कर पाए, तो उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टर उम्मीद कर रहे हैं कि नितेश दो से तीन दिन में अस्पताल से छुट्टी पा लेंगे।
यह सर्जरी एमवाय अस्पताल में नि:शुल्क की गई, जिसने न केवल एक अनमोल जीवन बचाया बल्कि इंदौर के डॉक्टरों की कुशलता का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया।
टीम का विवरण:
इस जटिल सर्जरी को जनरल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार शुक्ल के नेतृत्व में प्रोफेसर डॉ. ओडिया, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार महाजन, डॉ. सतीश वर्मा, डॉ. यश अग्रवाल, डॉ. अभिनय सोनी, डॉ. अर्पित तिवारी, और डॉ. ध्रुवसिंह गोहिल की टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।
