लॉरेंस विश्नोई स्टाइल में इंदौर में अपराध: नकली क्राइम ब्रांच बनकर कारोबारी का अपहरण, 5 लाख की क्रिप्टो ट्रांसफर
देशभर में लॉरेंस विश्नोई और भाऊ गैंग जिस तरह अपराध करते हैं उसी तरह अब इंदौर में भी अपराधियों ने हाई-प्रोफाइल टारगेटिंग शुरू कर दी है। वारदात में शामिल आरोपी पहले शिकार की लाइफस्टाइल और इनकम का पता लगाते हैं, फिर खुद को क्राइम ब्रांच अफसर बताकर अपहरण, धमकी और लूट करते हैं। ताजा मामला द्वारिकापुरी का है, जहां तीन युवकों ने मिलकर एक कारोबारी को अगवा किया और उसके मोबाइल से 5 लाख रुपए की क्रिप्टोकरेंसी (USDT) ट्रांसफर करवा ली।
नकली क्राइम ब्रांच बनकर लूट करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार
- आरोपियों ने लगभग ₹5 लाख के USDT और एक मोबाइल लूटा
- तीनों में से दो आरोपी आदतन अपराधी, इंदौर में दर्ज हैं करीब 2 दर्जन मामले
- आरोपी प्रॉपर्टी दलाली और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं
- पढ़ाई केवल 10वीं–12वीं तक ही की
वारदात कैसे हुई
फरियादी स्नेह परमार ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दी कि 9 अक्टूबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच तीन युवक—दीपक तिवारी, नीरज तिवारी और अमन लखिया—खुद को क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर उसके घर पहुंचे।
उन्होंने पहले स्नेह और उसके पिता के साथ मारपीट की, फिर उन्हें गाड़ी में बैठाकर लसुड़िया क्षेत्र ले गए। वहां धमकाया गया कि “तुम फ्रॉड करते हो, जेल जाना पड़ेगा।”
डर के माहौल में स्नेह से उसके मोबाइल के जरिए 5773 USDT (करीब ₹5,12,000) ट्रांसफर करवा लिए। इतना ही नहीं, आगे और रकम की डिमांड भी की गई।
पुलिस की कार्रवाई
फरियादी की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने तुरंत कार्रवाई की। तकनीकी जांच और खातों के विश्लेषण से तीनों आरोपियों की पहचान की गई।
- दीपक तिवारी (15 पुराने अपराध)
- नीरज तिवारी (13 पुराने अपराध)
- अमन लखिया (स्कीम 54 निवासी)
तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उनके खातों को फ्रीज किया और मोबाइल जब्त किए हैं।
क्राइम ब्रांच की सख्ती
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने हाल ही में शहर में बढ़ रहे ऐसे हाई-टेक अपराधों पर सख्त निर्देश दिए थे। उनके आदेश पर संदिग्ध गतिविधियों और गैंगस्टर-स्टाइल अपराधों पर कड़ी कार्रवाई जारी है।
मामला दर्ज
अपराध क्रमांक: 178/2025
धारा: 115(2), 140(3), 308(2), 309(6), 319(2) – भारतीय न्याय संहिता (BNS)
घटना स्थल: 716, 60 फीट रोड, गांधी चौक, द्वारिकापुरी, इंदौर
📍पुलिस का बयान:
“आरोपियों ने कबूला कि वे फरियादी की कमाई पर नजर रखे हुए थे और क्राइम ब्रांच बनकर वसूली की योजना बनाई थी। आगे और मामलों की जांच जारी है।”
