“इंदौर आबकारी घोटाला: फर्जी चालानों से सरकारी खजाने पर 71 करोड़ का प्रहार, दो ठेकेदार गिरफ्तार – अब अफसरों की बारी”
इंदौर।
इंदौर में चल रहे आबकारी फर्जी चालान घोटाले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो शराब ठेकेदारों अंश त्रिवेदी और राजू दशवंत को गिरफ्तार किया है। दोनों को अदालत ने 8 अक्टूबर तक ईडी रिमांड पर भेजा है।
पहले जिस घोटाले को 49 करोड़ रुपए का माना जा रहा था, अब उसकी रकम बढ़कर 71 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। ईडी अब इस मामले में उन आबकारी अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिन्होंने इस खेल को संभव बनाया।
194 फर्जी चालान, करोड़ों का खेल
जांच में खुलासा हुआ कि यह घोटाला 194 बैंक चालानों के ज़रिए किया गया।
आरोपियों ने चालानों में अंकों और शब्दों के माध्यम से रकम बढ़ाई और फर्जी ट्रेजरी एंट्री कर सरकारी खजाने से करोड़ों निकाल लिए।
ईडी अब तक 22 करोड़ रुपए की वसूली कर चुकी है।
यह घोटाला कोई नया नहीं — इसकी जड़ें 8 साल पुरानी हैं।
उस वक्त रावजी बाजार थाने में 14 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। कुछ अफसरों को निलंबित किया गया, मगर बाद में ज्यादातर बहाल कर दिए गए।
ईडी की रेड और नए नामों का खुलासा
हाल ही में ईडी ने इंदौर के 18 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे।
जांच में कई शराब समूहों और ठेकेदारों के नाम सामने आए —
अविनाश और विजय श्रीवास्तव (एमजी रोड समूह), राकेश जायसवाल (जीपीओ चौराहा समूह), योगेंद्र जायसवाल (तोपखाना समूह), राहुल चौकसे (बायपास देवगुराडिया), सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल कुशवाह, लवकुश और प्रदीप जायसवाल आदि शामिल हैं।
अब ईडी ने तत्कालीन सहायक आयुक्तों — संजीव दुबे, डीएस सिसोदिया, सुखनंदन पाठक, कौशल्या सबवानी, धनराज परमार और अनमोल गुप्ता — को पूछताछ के लिए समन जारी कर दिए हैं। माना जा रहा है कि मंगलवार को इनसे ईडी कार्यालय में पूछताछ होगी।
कैसे रचा गया यह घोटाला
ईडी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ठेकेदारों ने जानबूझकर कम रकम के चालान जमा किए,
और “राशि शब्दों में” वाला कॉलम खाली छोड़ दिया।
बाद में इन्हीं चालानों में रकम बढ़ाकर जाली चालान बना लिए गए।
इन चालानों को आबकारी कार्यालयों में शुल्क भुगतान के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया गया,
जिससे NOC और शराब लाइसेंस जारी कराए गए।
परिणाम — राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान।
मुख्य साज़िशकर्ता और आगे की कार्रवाई
ईडी के अनुसार, अंश त्रिवेदी और राजू दशवंत इस पूरे नेटवर्क के मुख्य साज़िशकर्ता हैं।
इन्होंने ही फर्जी चालानों की योजना बनाई और अफसरों की मिलीभगत से उसे अंजाम दिया।
ईडी को अब उम्मीद है कि आगे की जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर होगी।
