Oct 26 2026 / 10:28 AM

स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम बना मौत का जाल: इंदौर में आग से कार शोरूम मालिक की मौत, परिवार गंभीर

इंदौर। शहर में गुरुवार की सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या हाईटेक घर वाकई सुरक्षित हैं या खतरे का कारण बन रहे हैं। लसूड़िया थाना क्षेत्र में कार शोरूम मालिक प्रवेश अग्रवाल की मौत घर में लगी आग में हो गई, जबकि उनकी पत्नी और दो बेटियाँ गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

🔒 स्मार्ट सिस्टम की खामी बनी जानलेवा

जानकारी के मुताबिक, आग घर के किचन से शुरू होकर पूरे पेंटहाउस में फैल गई। अनुमान है कि आग पूजा कक्ष में जल रही अखंड ज्योत से लगी। लेकिन असली त्रासदी तब हुई जब हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम का सेंट्रल लॉक आग से जाम हो गया। इससे पूरा परिवार घर के अंदर फँस गया और बाहर निकलना नामुमकिन हो गया।

धुएं के कारण दम घुटने से प्रवेश अग्रवाल की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी रेखा और दोनों बेटियाँ — 14 वर्षीय सौम्या और 12 वर्षीय मायरा — गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें इलाज के लिए कुशल नगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

🚒 मदद मिलने में हुई देरी

सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुँची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। बताया गया कि हादसे के समय बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड मौजूद था, लेकिन वह भी समय पर सहायता नहीं कर सका।

🏠 राजनीति और कारोबार दोनों में सक्रिय थे प्रवेश

प्रवेश अग्रवाल सौम्या मोटर्स नाम से कई कार शोरूम चलाते थे और पूर्व सीएम कमल नाथ के करीबी माने जाते थे। उन्होंने नर्मदा युवा सेना की भी स्थापना की थी और देवास क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय थे।

🙏 कमल नाथ ने जताया शोक

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा —

“इंदौर में आग लगने की दुर्घटना में कांग्रेस नेता प्रवेश अग्रवाल के निधन और उनकी पत्नी के गंभीर रूप से अस्वस्थ होने का समाचार सुनकर अत्यंत पीड़ा हुई। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।”

⚠️ सवाल: क्या ‘स्मार्ट होम’ वाकई सुरक्षित हैं?

यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम, जिनका उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना है, आकस्मिक स्थितियों में जानलेवा साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिस्टम में इमरजेंसी मैनुअल एग्जिट का होना बेहद जरूरी है, ताकि बिजली या आग जैसी परिस्थितियों में लोग फँसे नहीं।

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