Oct 26 2026 / 10:10 AM

इंदौर चिड़ियाघर से हाथी मोती को वनतारा भेजने के निर्देश, शहरभर में विरोध तेज

लोगों में गुस्सा, बोले – हमारी धरोहर छीनने की कोशिश

इंदौर |

इंदौर चिड़ियाघर में रह रहे 65 वर्षीय हाथी मोती को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा रेस्क्यू सेंटर भेजने के प्रस्ताव पर इंदौर में जबरदस्त विरोध देखा जा रहा है। हाई पावर कमेटी द्वारा भेजे गए ट्रांसफर आदेश के बाद ज़ू प्रबंधन, नगर निगम और आम जनता ने एक स्वर में इसका कड़ा विरोध किया है।

स्थानीय लोग इस निर्णय को इंदौर की संस्कृति, भावनात्मक जुड़ाव और पशु कल्याण के खिलाफ मान रहे हैं।

🔴 स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा: “मोती हमारी पहचान है”

सोशल मीडिया से लेकर ज़मीनी स्तर तक इंदौर के लोग इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। लोग चिड़ियाघर के बाहर पोस्टर लेकर विरोध कर रहे हैं और #SaveMoti जैसे हैशटैग ट्रेंड हो रहे हैं।

“मोती को हम बच्चों की तरह देखते आए हैं। वह सिर्फ एक जानवर नहीं, हमारी यादों का हिस्सा है,”
— एक स्थानीय बुज़ुर्ग महिला ने कहा।

⚠️ ज़ू प्रबंधन और डॉक्टरों की चेतावनी: ट्रांसफर है जानलेवा जोखिम

चिड़ियाघर के प्रभारी डॉक्टर उत्तम यादव के अनुसार, मोती की मानसिक और शारीरिक स्थिति वर्तमान में इतनी नाज़ुक है कि उसे स्थानांतरित करना घातक हो सकता है।

“मोती गुस्सैल और आक्रामक प्रवृत्ति का है। एनेस्थीसिया देकर ट्रांसपोर्ट करना पड़ेगा, और सफर के दौरान ज़रा सी चूक उसकी जान ले सकती है।”

वन विहार नेशनल पार्क, भोपाल की 2023 की रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से इसे “हाई रिस्क ट्रांसफर” बताया गया था।

🐘 क्या है वनतारा प्रोजेक्ट?

वनतारा सेंटर जामनगर (गुजरात) में रिलायंस फाउंडेशन द्वारा संचालित एक विशाल पशु पुनर्वास केंद्र है, जो 3,500 एकड़ में फैला है। यहाँ घायल और बीमार जानवरों की देखभाल की जाती है। लेकिन जानवर की उम्र, व्यवहार और आदतों को देखते हुए हर स्थानांतरण उचित नहीं होता।

🏥 मोती के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता, साथी लाने की योजना

जू प्रशासन मोती की एकाकी जीवनशैली को सुधारने के लिए उज्जैन से एक मादा हाथी लाने की योजना पर भी काम कर रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि नया साथी मोती के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।

📢 जनता की अपील: हमारी भावनाएं समझें

इंदौर के निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि इस प्रस्ताव को रद्द किया जाए और मोती को शहर में ही सुरक्षित रखा जाए।

“हमें आधुनिक सेंटर की ज़रूरत नहीं, हमें हमारा मोती चाहिए। उसे यहां छोड़िए जहां उसे प्यार मिलता है,” — एक स्कूली छात्रा ने कहा।

निष्कर्ष: तकनीकी, नैतिक और भावनात्मक – हर स्तर पर यह ट्रांसफर सवालों के घेरे में

मोती को वनतारा भेजने का निर्णय भले ही पशु कल्याण के उद्देश्य से हो, लेकिन जब पशु की सुरक्षा, स्थानीय विशेषज्ञों की राय और जनता की भावनाएं उसके खिलाफ हों, तो इस पर दोबारा विचार ज़रूरी हो जाता है।

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