जागो जिम्मेदार, क्यों कर रहे मौत का इंतज़ार?
इंदौर।
रानीपुरा में मकान ढहने से हुई मौत के बाद भी नगर निगम के अफसर और जनप्रतिनिधि सबक लेने को तैयार नहीं हैं। हर बार की तरह सिर्फ खतरनाक मकानों की सूची बनाई जाती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर फाइलें धूल खाती रहती हैं। हैरानी की बात यह है कि निगम के खुद के दफ्तर और किराए पर दिए गए मार्केट तक जर्जर हालत में हैं।
खतरनाक सूची, लेकिन कार्रवाई शून्य
बारिश से पहले नगर निगम ने 150 से ज्यादा खतरनाक मकानों की लिस्ट तैयार की थी। मगर इनमें से सिर्फ 2–3 मकानों को झांकी मार्ग पर दिखावे के लिए तोड़ा गया और फिर अभियान ठंडे बस्ते में चला गया। बाक़ी मकान मौत को दावत दे रहे हैं और निगम हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
नेहरू नगर की जर्जर बिल्डिंगें – मौत के फंदे पर जिंदगी
नेहरू नगर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 50 साल पुरानी 17 बिल्डिंगों में 406 फ्लैट और 2 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। दीवारों से प्लास्टर पूरी तरह झड़ चुका है, ईंटें और सरिए साफ नज़र आते हैं। रहवासी कमलेश पटेरिया बताते हैं कि विधायक और पार्षद से कई बार शिकायत की गई, लेकिन नतीजा सिर्फ आश्वासन निकला। डेढ़ महीने पहले विधायक महेंद्र हार्डिया आए थे, हाउसिंग बोर्ड से चर्चा भी हुई, लेकिन नई बिल्डिंग का प्रस्ताव अभी तक धूल फांक रहा है।
निगम के दफ्तर भी खतरे में
निगम मुख्यालय का राजस्व विभाग का पुराना दफ्तर भी जर्जर हो चुका है। बारिश में पानी भरने से तीन साल पहले यहां का रिकार्ड खराब हो गया था और रिकॉर्ड रूम ही हटा दिया गया। सरवटे और नवलखा मार्केट की हालत भी ऐसी है कि वहां रोजाना प्लास्टर गिरता है।
खतरे के बीच जिंदगी
रहवासियों का कहना है कि वे जगह खाली करने को तैयार हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस योजना नहीं बताई। हालात इतने खराब हैं कि पिछले हफ्ते एक मकान में सुरक्षा के लिए लगाई गई चद्दरों पर मलबा गिरा और चद्दरें मलबे समेत घर के अंदर आ गईं।
👉 सवाल यह है कि क्या नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड लोगों की जान जाने का इंतजार कर रहे हैं?
या फिर हर हादसे के बाद सिर्फ दिखावटी सर्वे और खोखले वादों का सिलसिला ही चलता रहेगा?
