Apr 18 2026 / 6:14 AM

GST बदलाव से बढ़ी ऑटोमोबाइल डीलरों की मुश्किलें, ₹2500 करोड़ टैक्स फंसा, सुप्रीम कोर्ट में मामला

इंदौर। हाल ही में लागू हुए जीएसटी 2.0 ने जहां आम वाहन खरीदारों को राहत दी है, वहीं देशभर के ऑटोमोबाइल डीलर्स के लिए यह नई सिरदर्दी बन गया है। पुराने स्टॉक पर पहले से जमा किए गए टैक्स की वापसी न होने से करीब ₹2500 करोड़ रुपये फंस गए हैं। केवल मध्य प्रदेश में ही इसका असर लगभग ₹250 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने इस मामले को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। इंदौर सहित राज्य के कई डीलर्स इस याचिका में शामिल हैं।

कर विशेषज्ञों का कहना है कि 22 सितंबर से पहले वाहनों पर जीएसटी के साथ-साथ कॉम्पेनसेशन सेस (मुआवजा उपकर) भी वसूला जाता था। कंपनियां यह टैक्स बुकिंग के समय ही डीलरों से ले लेती थीं। अब दरें घटने के बाद भी उस रकम का रिफंड या एडजस्टमेंट संभव नहीं हो पाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस पर जल्द कोई स्पष्ट नीति नहीं लाती, तो यह रकम लंबे समय तक अटकी रह सकती है, जिससे ऑटो सेक्टर की तरलता (liquidity) पर भी असर पड़ेगा।

Share With

मध्यप्रदेश