RBI का बड़ा फैसला: मृतक खाताधारकों के परिजनों को मिलेगा 15 लाख तक का क्लेम, प्रक्रिया हुई आसान
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मृतक खाताधारकों के परिजनों को राहत देते हुए बैंक खातों और लॉकर से जुड़ी क्लेम प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। अब मृतक के नामांकित व्यक्ति (Nominee) या वैध वारिस 15 लाख रुपये तक की राशि बिना जटिल कानूनी अड़चनों के हासिल कर सकेंगे।
सहकारी बैंकों में सीमा कम
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये होगी। यानी, सहकारी बैंक के ग्राहक के निधन पर उनके परिजन अधिकतम 5 लाख रुपये तक का दावा कर सकते हैं।
जरूरी दस्तावेज
परिजनों को क्लेम के लिए निम्न दस्तावेज देने होंगे:
- दावा प्रपत्र (Claim Form)
- मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
- दावेदार की पहचान (Valid ID)
- क्षतिपूर्ति बांड
- अन्य उत्तराधिकारियों से अस्वीकरण पत्र (यदि लागू हो)
इसके अलावा, बैंक अब वैध उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र या स्वतंत्र व्यक्ति की घोषणा को भी मान्य कर सकेंगे। खास बात यह है कि बैंकों को अब किसी तीसरे पक्ष से गारंटी बांड की मांग करने की अनुमति नहीं होगी।
तय समय सीमा और बैंक पर जुर्माना
आरबीआई ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि आवश्यक दस्तावेज मिलने के 15 दिनों के भीतर क्लेम निपटाना होगा।
- जमा राशि (Deposits): 15 दिन में निपटारा
- लॉकर/सुरक्षित वस्तुएं: 15 दिन में सूचीकरण और प्रक्रिया तय
अगर बैंक देरी करता है तो उसे जुर्माना देना होगा:
- जमा राशि पर 4% अतिरिक्त ब्याज दर से भुगतान करना होगा।
- लॉकर या सुरक्षित वस्तुओं के मामले में ₹5,000 प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा।
कब से लागू होगा नया नियम?
यह नया ढांचा पुराने नियमों की जगह लेगा और 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह लागू हो जाएगा। आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे इसे जल्द से जल्द लागू करें, ताकि ग्राहकों को समय पर राहत मिल सके।
क्यों अहम है यह कदम?
पहले मृतक खाताधारक की राशि क्लेम करने के लिए परिजनों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और कई तरह की औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता था। इस वजह से कई मामलों में क्लेम सालों तक अटका रहता था।
नए नियम से न केवल परिजनों को त्वरित राहत मिलेगी, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
